
महिलाओं की व्यथा
जवानी ढल गई लेकिन नहीं हुआ पेयजल समस्या का समाधान
चेहरे पर लटक गई खूबसूरती फिर भी नहीं मिल रहा दो बूंद पानी
जलदाय विभाग के एक अधिकारी हमसे चिढ़ते है
अलवर शहर में पेयजल समस्या वर्षों से सर चढ़ कर बोल रही है।इसका सबसे अधिक खामियाजा गरीब और मध्यम वर्गीय महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है।शासन प्रशासन से हताश निराश महिलाओं ने कहा, 25 की उम्र में अलवर शहर के एक मोहल्ले में शादी होकर कुछ अलग सपने लेकर इतराती आई,लेकिन शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष से पेयजल किल्लत गिफ्ट में मिल गया।बस अब क्या था, पेयजल संकट ने तमाम तीज त्योहार यहाँ तक कि सावण भी भुला दिया।आज शादी के पच्चीस बरस हो गए ,उम्र 50 की हो गई लेकिन पेयजल संकट आज भी पल्लू से पिंड नहीं छोड़ रहा है।पेयजल संकट ने मेरी जिंदगी नरक बना दी। जवानी पेयजल संकट की भेट चढ़ गई और अधेड़ बन गई।थोड़े दिन बाद परिवार के सदस्य निश्चित बढ़ेंगे और पोते पोती के साथ खुशी खुशी दिन बिताने की सोच रही हूं,लेकिन इस खुशी में भी कमबख्त
पेयजल संकट खलल पैदा नहीं कर दे यह सोच कर मन मुरझा जाता है और माथे की नशों में दबाव बढ़ जाता है।आखिर किसको बताए अपनी पीड़ा।जवानी में कांग्रेस और बीजेपी सरकार को देखा लेकिन किसी भी सरकार ने अलवर शहर की हर वर्ष मई जून में आने वाली गम्भीर समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया।
इधर,एक मोहल्ले की महिलाओं का कहना है कि जलदाय विभाग के एक अधिकारी हमारी बस्ती की महिलाओं से चिढ़ते है और जानबूझकर पेयजल संकट पैदा कर हमें जीवन से निराश कर गलत कदम उठाने पर मजबूर कर रहे है।
बहरहाल,नोतपा में विधाता की मेहरबानी के चलते सिली सिली पवन चल रही है।जिससे मन खुश हो रहा है लेकिन फिर वही पेयजल संकट गड़बड़ कर देगा।आखिर किससे कहे अपनी व्यथा।
राजी
वश्रीवास्तव
